Farmers Protest: क्या सरकार किसान आंदोलन को दबा रहा है? जाने पुरा कारण… - Freshers Quiz

Farmers Protest: क्या सरकार किसान आंदोलन को दबा रहा है? जाने पुरा कारण…

Farmers Protest 2.0: किसानों को मनाने के लिए केंद्र सरकार के तीन मंत्रियों ने सोमवार को चंडीगढ़ में किसान नेताओं से बातचीत की। इस बातचीत में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय शामिल थे।

सरकार ने दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिया है। किसानों को रोकने के लिए बेरिकेडिंग कर दी है और पंजाब तथा हरियाणा के रातो को बंद कर दिया गया है।

सरकार ऐसा इसलिए कर रही ताकि किसी की कोई जन हानि ना हो। क्योंकि आंदोलन किसी के बहकावे में आकर उग्र रूप ले तो फिर मुश्किल होगा। इसलिए सरकार सुरक्षा इंतजाम कड़े कर रही है।

इस बातचीत को लेकर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बताया, “बातचीत चल रही है। तीन मंत्री केंद्र सरकार के दिल्ली से चलकर चंडीगढ़ आए हैं। मुझे उम्मीद है कि बातचीत से ये मसला हल हो जाएगा।”

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लेकिन, इस बीच उन्होंने ये संकेत भी दिए कि अगर बातचीत नाकाम रही तो भी सरकार ने अपनी तरफ से पूरी तैयार की हुई है।

अनिल विज ने कहा, “बातचीत अपनी जगह है और अपने प्रदेश हरियाणा के लोगों की सुरक्षा करना और यहां पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो हमें करना पड़ेगा, वो हम करेंगे।”

केंद्र सरकार और हरियाणा की सरकार पंजाब और दूसरे राज्यों के किसानों को रोकने के लिए दिनभर तैयारी में व्यस्त रहीं।

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दिल्ली के हर बॉर्डर पर सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक राजधानी दिल्ली में धारा 144 लगा दी गई है।

क्या है किसानों की मांग

किसान और मज़दूरों के संगठनों ने कई मांगों को लेकर दिल्ली कूच की तैयारी की है. किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने इन मागों की जानकारी दी।

पंजाब किसान मजूदर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “अगर स्वयं प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) जी कोशिश करें जैसे 75 सालों से एमएसपी खरीद की गारंटी का कानून नहीं दिया गया, उस पर कोई नोटिफेकशन जारी करें, उसके बाद डॉक्टर स्वामीनाथन कमीशन की जो रिपोर्ट है सी 2 प्लस 50 परसेंट, उसके हिसाब से हमें दाम मिलें फसलों के. सी टू प्लस 50 परसेंट का मतलब है, जितनी हमारा लागत खर्चा है, उस पर 50 प्रतिशत मुनाफा दें. गन्ने की फसल एक साल की है तो उसका 100 परसेंट बनता है. किसान मजदूर का कर्ज खत्म करने का सवाल है. केस वापस लेने का सवाल है. बिजली संशोधन बिल का सवाल है. लखीमपुर खीरी का इंसाफ है.”

उन्होंने बताया कि इसमें मज़दूरों के सवाल भी उठाए गए हैं. उन्हें नरेगा में 200 दिन काम देने और दिहाड़ी 700 रुपये करने की मांग है.

पंढेर ने कहा, “देखिए, अभी एक महीना (लोकसभा चुनाव में) रह गया है, मोदी जी चाहें तो किसान मज़दूर का दिल जीत सकते हैं. अगर उन्हें मंत्रिमंडल से निकाला जाए तो लोगों के दिल खुश हो जाएंगे. ”

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